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Holi(होली) कब और क्यों मनाते हैं ?

Holi(होली) कब और क्यों मनाते हैं ?

होली रंगों का त्योहार है,यह तो सभी को पता होगा कि होली कब है, अगर नहीं पता है तो जान ले इस साल होली 10 मार्च को बनाया जाएगा , पर क्या आपको पता है कि होली क्यों बनाया जाता है? होली(Holi)  का नाम सुनते ही मन में खुशी और उल्लास की भावना उत्पन्न हो जाती है । होली रंगों का त्योहार है जिसमें बच्चे से लेकर बूढ़े व्यक्ति तक शामिल होकर धूमधाम से इस दिन को सबके साथ मिलकर खुशियां से मनाते हैं,इसलिए होली को सब खुशियों का त्यौहार भी कहते हैं । क्या आपको पता है,भारत देश जैसा पूरे विश्व में कोई दूसरा देश नहीं है जहां लोग एक साथ मिलकर बिना किसी भेदभाव के इस त्यौहार को मनाते हैं ।

         
Holi(होली) कब और क्यों मनाते हैं ?
     
यह त्यौहार हिंदुओं का प्रमुख और प्रचलित त्यौहार है लेकिन फिर भी होली को हर धर्म के लोग एक साथ मिलकर प्रेम से बनाते हैं जिसकी वजह से यह त्यौहार एक दूसरे के प्रति स्नेह बढ़ाती है।


हमारे देश में जितने भी त्यौहार मनाए जाते हैं उन सब के पीछे एक पौराणिक और सच्ची कथा छुपी हुई होती है ठीक उसी तरह होली के रंग के साथ खेलने के पीछे भी बहुत सी कहानियां है आज इस लेख में हम यह जानेंगे कि होली क्या है और क्यों मनाते हैं ।

Holi(होली) कब और क्यों मनाते हैं ?


होली(Holi) क्या है (what is holi in Hindi)


Holi(होली) कब और क्यों मनाते हैं ?

 होली हिंदुओं का प्रमुख त्यौहार में से एक है। होली का दिन बड़ा ही शुभ होता है, यह त्योहार हर साल वसंत ऋतु के समय फागुन यानी कि मार्च के महीने में आता है, जिसे पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है और यह सबसे ज्यादा खुशी देने वाला त्यौहार में से एक है यह बसंत का त्यौहार है । इसके आने पर सर्दी खत्म हो जाती है और गर्मी की शुरुआत होती है ।

इस साल 9 मार्च को देशभर में होली का पर्व खेली जाएगी। होली के त्योहार उत्सव फागुन के अंतिम दिन होलिका दहन की शाम से शुरू होकर और अगले दिन सुबह सभी लोग आपस में मिलते हैं , एक दूसरे से गले लगते हैं और एक दूसरे को रंग और अबीर लगाते हैं। इस दौरान पूरा वातावरण बेहद सुंदर और रंगीन नजर आती है । इस पर्व को एकता प्यार खुशी सुखी और बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में जाना जाता है।

होली(Holi) क्यों मनाई जाती है?अब हम लोग जानेंगे कि आखिर होली का त्यौहार क्यों मनाया जाता है?

    
Holi के त्यौहार से अनेक पौराणिक कहानियां जुड़ी हुई है, जिसमें से सबसे प्रचलित कहानी है पहलाद और उनकी भक्ति को माना जाता है। कहानी यह है कि प्राचीन काल में हिरण कश्यप नाम का एक बलशाली अशुर हुआ करता था , जिसे ब्रह्मदेव द्वारा यह वरदान मिला था, कि उसे कोई इंसान या कोई जानवर नहीं मार सकता, ना ही कोई अस्त्र या शस्त्र से ,ना घर के बाहर ना घर के अंदर, ना ही दिन में और ना ही रात में ,ना ही धरती पर और ना ही आसमान में ।

अशूर(हिरण्यकश्यप) को इन अश्मित शक्ति होने की वजह से वह घमंडी हो गया था और खुद को ही भगवान समझता था। अपने राज्य के सभी लोगों के साथ अत्याचार करता था, और सभी को भगवान विष्णु की पूजा करने से मना करता था और अपनी पूजा करने का निर्देश देता था क्योंकि वह अपने छोटे भाई की मौत का बदला लेना चाहता था जिसे भगवान विष्णु ने मारे थे।
     
हिरण कश्यप का एक पुत्र था जिसका नाम पहला था।एक अशुर का पुत्र होने के बावजूद वह अपने पिता का बात ना सुनकर वह भगवान विष्णु की पूजा करता था।
हिरन कश्यप केक शॉप से सभी लोग उसे भगवान मानने के लिए मजबूर हो गए थे शिवाय उसके इकलौते पुत्र पहलाद के।
हिरण्यकश्यप ने काफी बार प्रयास किया कि उसके फिल्म भगवान विष्णु की भक्ति छोड़ दें, मगर वह हर बार अपने प्रयास में असफल होते रहें। स्क्रीन में उसने अपने ही पुत्र की मृत्यु करने का फैसला लिया।

अपनी इस घिनौने चाल में उसने अपनी बहन होलिका से सहयोग मांगी, होलिका को भी भगवान शिव द्वारा एक वरदान प्राप्त था जिसमें उसे एक वस्त्र मिला था। इस वस्त्र को तन पर लपेटे से आग से कोई भी होलिका को नहीं चला सकता था। हिरण्यकश्यप ने एक षड्यंत्र रचा और होलिका को यह आदेश दिया कि वह पहलाद को अपने गोद में लेकर अग्नि में बैठ जाए। आग में होली का नहीं चल सकती क्योंकि उसे यह वरदान मिला है। उसका पुत्र उस आग में जलकर भस्म हो जाएगा जिससे सब को यह सबक मिलेगा कि अगर उसकी बात किसी ने नहीं मानी तो उसके साथ भी यही होगा।
   
जब होलिका प्रहलाद को लेकर आग में बैठी तब पहलाद भगवान विष्णु का जाप कर रहे थे। अपने भक्तों की रक्षा करने भगवान का सबसे बड़ा कर्तव्य होता है इसलिए उन्होंने उस समय एक ऐसा तूफान आया जिससे कि होलिका के शरीर से लिपटा वस्त्र उड़ गया। आग से ना जलने वाला वरदान खत्म और होलिका जलकर भस्म हो गई। दूसरी और भक्त पहलाद बच गया। इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में देखते हैं और उसी दिन से होली का उत्सव की शुरुआत की गई और होली को मनाने के लिए लोग रंगों से खेलने लगे।
Holi(होली) कब और क्यों मनाते हैं ?


होली के ठीक 1 दिन पहले होलिका दहन होता है जिसमें लकड़ी, हंस और गाय का गोबर से बने ढेर में इंसान अपनी आपकी बुराई भी इसके चारों और घूम कर आग में जलाते हैं। और अगले दिन से नयी शुरुआत रंग से करते हैं ताकि पूरा साल खुशियों से भरा हुआ रहे।

Holi(होली) कब और क्यों मनाते हैं ?


होली के दिन क्या नहीं करना है।


1. Chemical से बने रंगों या synthetic रंगों का इस्तेमाल बिल्कुल भी ना करें
2.आंखों को किसी भी व्यक्ति के आंख, नाक, मुंह और कान में ना डालें।
3. रंगो को किसी भी व्यक्ति पर भी जबरदस्ती ना डालें।
4. सस्ते Chinese रंगो से दूर रहें क्योंकि वह त्वचा के लिए बहुत हानिकारक है।
5.Eczema से पीड़ित व्यक्ति रंगों से दूर रहने की कोशिश करें

होली के दिन क्या करना है।

1. होली के दिन Organic and naturals रंगों का इस्तेमाल करें।

2. अपने चेहरे,शरीर और बाल पर कोई भी तेल लगा ले ताकि जब आप रंग को नहाते वक्त छुड़ाने की कोशिश करें तो वह आसानी से छूट जाए।

3. इस दिन आप जो कपड़े पहने उससे पूरे शरीर ढका होना चाहिए ताकि जब कोई दूसरा व्यक्ति आपको chemical से बने रंग लगाए तो आपकी त्वचा कपड़ों की वजह से बच जाए।

4. रंगों से खेलने के बाद अगर आपको त्वचा परेशानी हो जाए तो तुरंत अपने नजदीकी अस्पताल में इलाज करवाएं।

5. Asthma पीड़ित व्यक्ति Facemask का उपयोग रंग खेलते वक्त जरूर करें ।








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